सिंधु घाटी सभ्यता: एक प्राचीन भारतीय सभ्यता का अद्भुत इतिहास
सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilization) भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे प्राचीन और उन्नत सभ्यताओं में से एक थी। यह सभ्यता लगभग 2500 ईसा पूर्व से 1900 ईसा पूर्व के बीच फली-फूली और मुख्य रूप से आधुनिक पाकिस्तान और उत्तर-पश्चिम भारत में फैली हुई थी। इसे हड़प्पा सभ्यता (Harappan Civilization) भी कहा जाता है क्योंकि इस सभ्यता का पहला प्रमुख स्थल हड़प्पा था।
🏙️ नगर नियोजन और संरचना
सिंधु घाटी सभ्यता अपने सुनियोजित नगरों के लिए प्रसिद्ध थी। इसके प्रमुख शहरों में मोहनजोदड़ो, हड़प्पा, लोथल, कालीबंगा, धोलावीरा और राखीगढ़ी शामिल हैं। ये सभी नगर ईंटों से बने घरों, साफ-सुथरी सड़कों, और सुनियोजित जल निकासी प्रणाली के लिए प्रसिद्ध हैं।
मोहनजोदड़ो का ‘महान स्नानागार’ (Great Bath) उस समय की स्थापत्य कला का एक अद्भुत उदाहरण है।
🌾 जीवनशैली और अर्थव्यवस्था
इस सभ्यता के लोग मुख्य रूप से कृषि, व्यापार और कारीगरी से जुड़े थे।
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वे गेहूं, जौ, कपास आदि की खेती करते थे।
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लोथल जैसे बंदरगाह से समुद्री व्यापार के प्रमाण मिले हैं।
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धातु, मिट्टी और पत्थर की वस्तुएँ बनाना भी आम था।
🕉️ धर्म और आस्था
सिंधु घाटी सभ्यता के लोग प्रकृति पूजा करते थे।
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मातृ देवी (Mother Goddess) की मूर्तियाँ और
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पशुपति महादेव जैसे देवताओं के चित्र मिले हैं।
वे वृक्ष, पशु और अग्नि की पूजा करते थे, लेकिन मंदिरों के प्रमाण नहीं मिले हैं।
🪨 लिपि, कला और संस्कृति
सिंधु लिपि अब तक अविकसित और अपठनीय है, लेकिन यह चित्रलिपि जैसी लगती है।
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नृत्य करती हुई लड़की की कांस्य मूर्ति
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सील मुहरें,
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खिलौने, और आभूषण उस समय की कला को दर्शाते हैं।
📉 पतन के संभावित कारण
सिंधु घाटी सभ्यता के पतन के कई कारण माने जाते हैं:
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नदियों का मार्ग बदलना
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पर्यावरणीय परिवर्तन
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सूखा या बाढ़
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बाहरी आक्रमण (जैसे आर्यों द्वारा)
✅ निष्कर्ष
सिंधु घाटी सभ्यता न केवल भारत की बल्कि दुनिया की सबसे प्राचीन और विकसित सभ्यताओं में से एक थी। इसका नगर नियोजन, कला, संस्कृति और जीवनशैली आज भी शोधकर्ताओं और इतिहासकारों के लिए अध्ययन का विषय है।
यह सभ्यता भारतीय इतिहास की गौरवशाली विरासत है, जो हमें हमारे अतीत की उन्नति और परिपक्वता का बोध कराती है।
